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Politics in Bihar: जदयू और भाजपा के गठबंधन की परीक्षा बिहार विधानसभा चुनाव

11:54 PM
बिहार हमेशा से ही भारत की राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता आया है। बिहार और यूपी के लोगों का सपोर्ट किसी भी पार्टी को दिल्ली में सरकार बनाने के लिए जरूरी होता है। इसकी मुख्य वजह है सीटों की संख्या। बिहार और यूपी में लोकसभा की कुल सीटें हैं।


हाल ही में पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। हार के बाद भाजपा की खूब किरकिरी भी हुई। हालांकि इस हार के बारे में यह भी कहा गया कि कांग्रेस की जीत भाजपा से वोटरों की बेरूखी की वजह से हुई है। इसमें कांग्रेस ने कुछ खास नहीं किया है। लेकिन कांग्रेस के सपोर्टर्स इसे कांग्रेस के मेहनत की जीत करार दे रहे हैं। 


नीतीश कुमार, अमित शाह और रामविलास पासवान (गूगल इमेज)


पांच राज्यों के चुनाव में कांग्रेस ने तीन राज्यों में अपना विजय पताखा पहरा दिया। राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के नेतृत्व में कांग्रेस ने सरकार बनाई तो वहीं छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल ने सीएम पद की जिम्मेदारी संभाली। जबकि मध्यप्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस ने सरकार बनाई। 


चुनाव में भाजपा की हार के बाद बिहार में भी इसका असर दिखने लगा। बिहार में भाजपा और जदयू की सरकार है। जदयू भाजपा के साथ मिलकर बिहार में सरकार चला रही है। हार के बाद बिहार की राजनीति में जबरदस्त उथल-पुथल देखा गया। बिहार में विपक्षी नेताओं ने नीतीश सरकार पर हमला तेज कर दिया। 


विपक्षी पार्टियां नीतीश सरकार पर विफल होने का आरोप लगा रही है। बिहार सरकार के शराबबंदी के फैसले को भी विपक्षी पार्टी गलत बता रही है। राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर भी विपक्ष ने नीतीश सरकार पर जमकर निशाना साधा। 

अमित शाह और नीतीश कुमार (साथ में सुशील कुमार मोदी) गूगल इमेज


अब बिहार में आगामी लोकसभा को देखते हुए जदयू और भाजपा ने सीटों के बंटबारे का फॉर्मूला तैयार किया। लेकिन भाजपा के कई सहयोगी दल इससे नाराज हो गए। उपेन्द्र कुशवाहा ने भाजपा से अंतत: अलग होने का फैसला लिया और अलग हो गए। कुशवाहा के अलग होने के बाद एनडीए के एक और घटक दल ने सीट बंटबारे पर नाराजगी जताई। 


एनडीए में शामिल लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान ने भाजपा को चेतावनी देते हुए सीट बंटवारे को लेकर फिर से विचार करने को कहा। लेकिन बात नहीं बनी। लोकसभा चुनाव से पहले जदयू और भाजपा ने 100 में से 50-50 प्रतिशत सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला किया। 


लोकसभा चुनाव से ठीक बाद बिहार में विधानसभा चुनाव भी है। ऐसे में भाजपा को इस बात चिंता हो सकती है कि अगर लोकसभा में नैया पार लग भी गई तो आगे आने वाले विधानसभा चुनाव में क्या होगा। नाराज पार्टियां एनडीए के खिलाफ गठबंधन या लामबंद हो सकते है। अगर ऐसा करने में वे कामयाब होते तो भाजपा के लिए आगामी बिहार विधानसभा चुनाव मुश्किल भरा हो सकता है। 
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पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में हार कर भी बीजेपी ने जीत ली बाजी

दोस्तों नमस्कार,


फिर से एक बार मैं संतोष भारतीय हाजिर हूं। आईए बात करते हैं हाल ही सम्पन्न हुई विधानसभा चुनावों की। जी हां हम उसी विधानसभा चुनाव की बात कर रहे हैं जिसमें कांग्रेस ने लंबे समय के बाद बीजेपी को पछार कर तीन राज्यों में जीत का स्वाद चखा और सरकार भी बनाई।



निश्चित तौर पर कांग्रेस इस जीत के बाद काफी हर्ष का अनुभव कर रही होगी। हालांकि कांग्रेस की यह जीत ज्यादा अहम मानी जा रही है इस लिहाज से कि 2019 का लोकसभा चुनाव भी नजदीक है। जनता में से कई जगहों से इस तरह की आवाज उठ रही है कि 2019 में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस राहुल गांधी को एक पीएम कैन्डिडेट के रूप में प्रोजेक्ट करे।

लेकिन दोस्तों कांग्रेस की ये जीत काफी मुश्किल भरा रहा। कांग्रेस तीन राज्यों में सरकार तो बना ली, लेकिन काफी कड़ी मशक्कत के बाद। कांग्रेस को इतनी कड़ी प्रतिस्पर्धा की कतई उम्मीद ना थी। कांग्रेस ने बहुत कम अंतरों से इन राज्यों में जीत दर्ज की है। इससे एक बात तो साबित होता है कि लोगों ने कांग्रेस को वोट नहीं दिया बल्कि नया विकल्प नहीं होने की वजह से बीजेपी के खिलाफ वोट किया।



मध्यप्रदेश में हालात तो ऐसे थे कि दोनों ही पार्टियों की नब्ज अटकी हुई थी। दोनों ही पार्टियों के लिए मध्यप्रदेश में करो या मरो की स्थिति थी। लेकिन फिर राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन किया। बता दें कि कांग्रेस ने बीेजेपी के गढ़ में घुसकर 230 सीटों में से 114 सीटों पर जीत दर्ज की। यहां हम बात कर रहे हैं मध्यप्रदेश की। जी हां ये वहीं एमपी है जहां पर बीजेपी शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में सरकार चला रही थी।

यह मुकाबला इतना दिलचस्प था कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियां बहुमत के जादुई आंकड़े से दो कदम दूर रह गई। एक ओर जहां कांग्रेस 114 सीटों के साथ मात्र दो सीट से यह आंकड़ा नहीं छू सकी तो वहीं बीजेपी 109 सीट जीतकर इस बहुमत के जादुई आंकड़े से 7 सीट दूर रह गई थी। वहीं अन्य में बात करें तो बहुजन समाज पार्टी को दो सीटें और समाजवादी पार्टी को एक सीट और चार सीट निर्दलीय उम्मीदवार को खाते में गईं।



राज्य में इस हार के बाद बीजेपी को एक और जहां एक सबक मिला वहीं इन चुनावों के बाद भी जनता की पहली पसंद पीएम नरेंद्र मोदी ही हैं। युवा अभी भी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को ही देश का नेतृत्व देना चाहती है। उनकी पीएम के रूप में पहली पसंद नरेंद्र मोदी ही हैं। यानि देखा जाए तो भले ही देश की जनता ने राज्य में कांग्रेस के पक्ष में वोट किया लेकिन देश के नेतृत्व के लिए नरेंद्र मोदी के बेहतर उनके लिए कोई नहीं है।


यदि युवाओं के इस सोच को देखा जाए तो 2019 में भी फिर से बीजेपी के सत्ता में आने की पूरी संभावना है। भले ही कांग्रेस ने तीन राज्यों में बीजेपी को पटखनी दे दी हो लेकिन अभी भी कांग्रेस के लिए आगे की डगर कांटों भरी है।


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पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में हार कर भी बीजेपी ने जीत ली बाजी पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में हार कर भी बीजेपी ने जीत ली बाजी Reviewed by Santosh Bhartiya on 4:16 AM Rating: 5
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